डोनेशिया में शुक्रवार को आए भूकंप और सुनामी में अबतक कम से कम 1300 लोगों की मौत हो चुकी है.
अधिकारियों का मानना है कि ये संख्या और बढ़ सकती है. इस त्रासदी के पांच दिन बाद सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर पालू की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं. ये तस्वीरें यहां आई सुनामी से मची तबाही के मंज़र को बयां करती हैं.
देखें, कितना ज़्यादा नुक़सान हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस के मुताबिक़ इस आपदा से लगभग 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लगभग दो लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है.
जिस वक़्त भूकंप के झटके आए, उस वक़्त कई लोग समुद्र के किनारे एक त्यौहार की तैयारी कर रहे थे. अब पालू के आस-पास के पेटोबो जैसे इलाक़े पूरी तरह कीचड़ से पटे पड़े हैं.
नीचे तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे ढलानों में जमा हुए कीचड़ के कारण मिट्टी और गाद अब निचले हिस्से की ओर बह रही हैं.
एक अनुमान के मुताबिक़ बालारोआ में लगभग 1700 घर और पेटोबो में सैकड़ों घर ढह गए हैं. इसके अलावा क्रिस्चन स्टडी समूह के 30 बच्चों की भी मौत हो गई है.
पालू शहर के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी भाग से जोड़ने वाला 126 मीटर लंबा जीमालम ब्रिज पूरी तरह तबाह हो गया है. इस इस पुल को लगभग 3 लाख 50 हज़ार लोग इस्तेमाल करते थे.
सुनामी ने पालू शहर को मलबे से भर दिया है. यहां पानी, बिजली और खाने की बड़ी क़िल्लत है. रास्तों में पड़े मलबे ने यातायात रोक दिया है.
लोग मलबे से ऐसी चीज़ें बीन रहे हैं जो उनके काम आ सकती हैं. प्लास्टिक की चादरें या किचन का सामान उनके लिए बहुत मददगार हो सकता है.
ज़्यादतर मृतकों को सामूहिक कब्रों में दफ़नाया गया है मगर आशंका है कि कई शव अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं.
इंडोनेशियाई सेना ने एयरपोर्ट पर कमान संभाल हुई है ताकि घायलों और ज़रूरतमंदों तक राहत सामग्री आदि आसानी से पहुंचाई जा सके.
राज्य का ये पहला एयरपोर्ट पकयोंग में बनाया गया है जो राज्य
हवाई अड्डे का
रनवे का निर्माण करने वाली एक भारतीय कंपनी पुंज लॉयड के प्रवक्ता के मुताबिक मुश्किल जगह और मौसम की स्थिति की वजह से ये नौ साल का प्रोजेक्ट बेहद चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रहा.
इंजीनियरों का कहना है कि मुख्य चुनौती ऐसी साइट पर निर्माण और संकीर्ण पहाड़ी सड़कों से उपकरणों को लेकर जाना था. सिक्किम में अप्रैल से सितंबर तक बारिश होती है जो कि काम में एक बड़ी बाधा थी.
इस इलाके में भूकंप भी काफ़ी आते हैं जो इंजिनियरों के लिए एक और चुनौती थी.
रनवे समेत पूरा हवाई अड्डा ऐसी ज़मीन पर है जिसे गहरी घाटियों में 263 फीट लंबी दीवार खड़ी कर बनाया गया है. पुंज लॉयड कंपनी का कहना है कि यह दुनिया की सबसे ऊंची मज़बूती के लिए बनाई गई दीवारों में से एक है.
पकयोंग में उड़ाने 4 अक्तूबर से शुरू होंगी.
इस हवाई अड्डे से सिक्किम में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जो कई पर्वतों, ग्लेशियर और ऊंचाई पर स्थित झीलों का घर है.
किलोमीटर लंबा रनवे को दोनों सिरों पर गहरी घाटियां हैं. इसमें दो पार्किंग बे और एक टर्मिनल बिल्डिंग है, जहां एक समय में लगभग 100 यात्री मौजूद हो सकते हैं.
की राजधानी गंगटोक से 30 किलोमीटर दूर है. इस एयरपोर्ट को पहाड़ के किनारे बनाया गया है जिसे 'इंजीनियरिंग चमत्कार' ही कहा जा सकता है.
चीन की सीमा से 60 किलोमीटर दूर ये एयरपोर्ट एकड़ में फैला है और पकयोंग गांव के ऊपर एक पहाड़ पर बनाया गया है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 4, फुट है.
अधिकारियों का मानना है कि ये संख्या और बढ़ सकती है. इस त्रासदी के पांच दिन बाद सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर पालू की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं. ये तस्वीरें यहां आई सुनामी से मची तबाही के मंज़र को बयां करती हैं.
देखें, कितना ज़्यादा नुक़सान हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस के मुताबिक़ इस आपदा से लगभग 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लगभग दो लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है.
जिस वक़्त भूकंप के झटके आए, उस वक़्त कई लोग समुद्र के किनारे एक त्यौहार की तैयारी कर रहे थे. अब पालू के आस-पास के पेटोबो जैसे इलाक़े पूरी तरह कीचड़ से पटे पड़े हैं.
नीचे तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे ढलानों में जमा हुए कीचड़ के कारण मिट्टी और गाद अब निचले हिस्से की ओर बह रही हैं.
एक अनुमान के मुताबिक़ बालारोआ में लगभग 1700 घर और पेटोबो में सैकड़ों घर ढह गए हैं. इसके अलावा क्रिस्चन स्टडी समूह के 30 बच्चों की भी मौत हो गई है.
पालू शहर के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी भाग से जोड़ने वाला 126 मीटर लंबा जीमालम ब्रिज पूरी तरह तबाह हो गया है. इस इस पुल को लगभग 3 लाख 50 हज़ार लोग इस्तेमाल करते थे.
सुनामी ने पालू शहर को मलबे से भर दिया है. यहां पानी, बिजली और खाने की बड़ी क़िल्लत है. रास्तों में पड़े मलबे ने यातायात रोक दिया है.
लोग मलबे से ऐसी चीज़ें बीन रहे हैं जो उनके काम आ सकती हैं. प्लास्टिक की चादरें या किचन का सामान उनके लिए बहुत मददगार हो सकता है.
ज़्यादतर मृतकों को सामूहिक कब्रों में दफ़नाया गया है मगर आशंका है कि कई शव अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं.
इंडोनेशियाई सेना ने एयरपोर्ट पर कमान संभाल हुई है ताकि घायलों और ज़रूरतमंदों तक राहत सामग्री आदि आसानी से पहुंचाई जा सके.
सोमवार को उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम
में भारत के 100वें हवाई अड्डे का उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने
किया जिसे दुनिया के सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों में से एक कहा जा सकता है.
हिमालय
में स्थित सिक्किम राज्य में दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत कंचनजंगा
है. ये राज्य आठ पर्वतों के माध्यम से तिब्बत, भूटान और नेपाल से जुड़ा हुआ
है. राज्य का ये पहला एयरपोर्ट पकयोंग में बनाया गया है जो राज्य
हवाई अड्डे का
रनवे का निर्माण करने वाली एक भारतीय कंपनी पुंज लॉयड के प्रवक्ता के मुताबिक मुश्किल जगह और मौसम की स्थिति की वजह से ये नौ साल का प्रोजेक्ट बेहद चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रहा.
इंजीनियरों का कहना है कि मुख्य चुनौती ऐसी साइट पर निर्माण और संकीर्ण पहाड़ी सड़कों से उपकरणों को लेकर जाना था. सिक्किम में अप्रैल से सितंबर तक बारिश होती है जो कि काम में एक बड़ी बाधा थी.
इस इलाके में भूकंप भी काफ़ी आते हैं जो इंजिनियरों के लिए एक और चुनौती थी.
रनवे समेत पूरा हवाई अड्डा ऐसी ज़मीन पर है जिसे गहरी घाटियों में 263 फीट लंबी दीवार खड़ी कर बनाया गया है. पुंज लॉयड कंपनी का कहना है कि यह दुनिया की सबसे ऊंची मज़बूती के लिए बनाई गई दीवारों में से एक है.
पकयोंग में उड़ाने 4 अक्तूबर से शुरू होंगी.
इस हवाई अड्डे से सिक्किम में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जो कई पर्वतों, ग्लेशियर और ऊंचाई पर स्थित झीलों का घर है.
किलोमीटर लंबा रनवे को दोनों सिरों पर गहरी घाटियां हैं. इसमें दो पार्किंग बे और एक टर्मिनल बिल्डिंग है, जहां एक समय में लगभग 100 यात्री मौजूद हो सकते हैं.
की राजधानी गंगटोक से 30 किलोमीटर दूर है. इस एयरपोर्ट को पहाड़ के किनारे बनाया गया है जिसे 'इंजीनियरिंग चमत्कार' ही कहा जा सकता है.
चीन की सीमा से 60 किलोमीटर दूर ये एयरपोर्ट एकड़ में फैला है और पकयोंग गांव के ऊपर एक पहाड़ पर बनाया गया है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 4, फुट है.
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